आखिर क्यों होती है भारतीय महिलाओं में कैल्शियम डेफेसिएन्सी? जाने कारण और निदान !

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Natural remedies to cure calcium deficiency

भारतीये महिलाओं में कैल्शियम की कमी अब एक एक आम समस्या बन चुकी है। जिसका प्रमुख कारण खान पान में हो रहा बदलाव है। आजकल शहरी क्षेत्र के महिलाओं के खानपान में विशेष रूप से बड़ा बदलाव आया है, इसका खुलासा हुआ एक ताजा सर्वे के जरिये किया गया है। तो आइये हम इस आर्टिकल में जानते हैं, आखिर क्यों होती है भारतीय महिलाओं में कैल्शियम डेफेसिएन्सी? जाने कारण और निदान !

Indian Medical Association से प्राप्त जानकारी के अनुसार आजकल की नयी जेनेरशन में पैक्ड एवं जंक फ़ूड का ज्यादा सेवन कैल्शियम की कमी का मुख्य कारण है। आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 17 साल आयु वर्ग की लगभग 20 प्रतिशत किशोरियों में कैल्शियम की कमी पाई गई है। इसके अलावां भारतीय शादी शुदा महिलाओं में कैल्शियम की कमी का प्रमुख कारण उनका खुद के सेहत पर ध्यान का ना देना है। अमूमन शादी के बाद महिलाएं घर-परिवार और बच्चों को सम्भालने में व्यस्त हो जाती हैं और वो खुद का ध्यान नहीं रख पाती।

वैसे ये बात बहुत अच्छी होती है क्योंकि यदि महिलाएं घर का ध्यान न रखें तो घर घर जैसा नहीं लगता, लेकिन इस दौरान वे अपना ध्यान रखना भूल जाती हैं और इसका दुष्प्रभाव उनके आगे के जीवन पर पड़ता है और सबसे आम समस्या होती है हड्डियों का कमज़ोर पड जाना. और ये समस्या खासकर भारत में तो कुछ ज्यादा ही है क्योंकि यहाँ पर स्त्रियां अपने स्वास्थ्य को एकदम से नाकर देती हैं.

जिन महिलाओं में कैल्शियम की कमी होती है, उनमे उम्र बढ़ने के साथ साथ हड्डियों के रोग होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे में सबसे ज्यादा खतरा ऑस्टोंपेरोंसिस बीमारी होने का रहता है जिसमें हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में हल्के से झटके से भी उनमें फैक्चर हो जाते हैं। साथ ही गर्भावस्था के दौरान अगर किसी महिला में कैल्शियम की कमी होती है, तो इससे महिला और शिशु दोनों के ही स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान या नवजात शिशु के दूध की आवश्यकता के लिए महिलाओं को सही मात्रा में कैल्शियम नहीं मिलता है तो इसका असर उनके अपने शरीर पर पड़ता है। ऐसे में कई बार उनके कूल्हे की हड्डी टेढ़ी हो जाती है जिससे उनकी सामान्य प्रसव होने में दिक्कत आती है।

डॉक्टरों के अनुसार मानवीय शरीर में हड्डियों का 70 प्रतिशत हिस्सा कैल्शियम फॉस्फेट से बना होता है। यही कारण है कि कैल्शियम हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व होता है। और महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कैल्शियम की जरुरत होती है, क्योंकि वे उम्र के साथ हड्डियों की समस्याओं से अधिक जूझती हैं। सामान्य और पर महिलाओं को औसतन एक दिन में 1000 मिली ग्राम कैल्शियम की जरुरत होती है, साथ ही विटामिन-डी का पर्याप्त सेवन भी आवश्यक है, क्योंकि विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम की क्षमता को बेहतर करता है तथा हड्डियों को खराब होने से बचाता है।

ऐसे में महिलाओं को चाहिए की कैल्शियम के साथ विटामिन-डी युक्त भोजन का सेवन करें, इसके अलावां विटामिन-डी के लिए सूर्य एक बहुत अच्छा स्रोत है तो ऐसे में रोज सुबह सुबह दस मिनट भी सूर्य की रौशनी में रहने से शरीर में विटामिन-डी की कमी पूरी हो जाती है। विटामिन-डी का पर्याप्त सेवन कैल्शियम अवशोषण को बेहतर बनाने के साथ-साथ, हड्डियों की क्षति कम करता है। फ्रैक्चर का खतरा कम करता है और ऑस्टियोपोरोसिस रोग होने से रोकता है। कैल्शियम की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे रक्त के थक्के बनना, रक्तचाप और हृदय की धड़कन बढ़ना, बच्चों में धीमा विकास, और कमजोरी व थकान।

आइये अब जानते हैं, शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण और निदान!

भारतीय महिलाओं में कैल्शियम की कमी के मुख्या कारण निम्नलिखित हैं :
(1). स्त्रियों में होने वाला रक्त का मासिक स्त्राव , प्रजनन की प्रक्रिया और मेनोपौस के दौरान होने वाली Oestrogen harmone की कमी.
(2). पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की अस्थियों का अपेक्षाकृत अधिक घना होना, तथा
(3). स्त्रियों के द्वारा भोजन में कैल्शियम की कम मात्रा का लेना।

कैल्शियम की कमी से बचाव के उपाय:
(1). जीवन के हर चरण पर शरीर को कैल्शियम की आवश्यकता होती है. अतः भोजन में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करें तथा दूध का सेवन करें.
(2). यदि आप गर्भवती हैं तो आपको कैल्शियम की कमी से बचने के लिए दूध व उससे बने पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए.
(3). यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है तो आपको 1000 मिलीग्राम कैल्शियम का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए.
(4). जंक फ़ूड (चाऊ मीन, बर्गर, पिज़्ज़ा इत्यादि ) से हर संभव दुरी बनाकर रखें.
(5). विटामिन-डी का सेवन भी समुचित मात्रा में जरूर करें. यदि आप शाकाहारी हैं तो इसके लिए मक्खन और नारियल; और यदि मांसाहारी हैं तो अंडे तथा मछली विटामिन-डी के मुख्य स्रोत हैं.
(6). यदि कुछ न कर पायें तो नियमित रूप से प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर पैदल चले जिससे अस्थियां सदैव स्वस्थ बनी रहे.

यदि आप ऊपर बताई गई बातों पर सही ध्यान दें तो आपके शरीर में कभी भी कैल्शियम की कमी नहीं होगी ! इसी के साथ हम आपके सवस्थ जीवन की कामना करते है और उम्मीद करते हैं की, आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी ! तो आप इसका लाभ उठायें तथा इस पोस्ट को लाईक करें और अपने मित्रों के साथ शेयर करें ताकि वो भी इस जानकारी का लाभ उठा सकें ! और यदि आप अपना कोई सुझाव या विचार हमसे शेयर करना चाहते है तो आप हमे कमेंट भी कर सकते है ! धन्यवाद् !!

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नमस्कार...!! इस खूबसूरत संकलन को आपलोगों के समक्ष ज्ञानवाटिका संपादन टीम के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके प्रधान सम्पादक और एडमिन विकास कुमार तिवारी जी हैं. इस खूबसूरत संग्रह को बनाने और आपके समक्ष लाने में कई दिन और कई रातों का सतत प्रयास शामिल है, और हम आगे भी इसी निष्ठा से आपके समक्ष महत्वपूर्ण तथा अनमोल जानकारियों को संकलित कर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं...! इसके साथ ही हम इस बात के लिए भी आशान्वीत हैं की आप सभी अपना महत्वपूर्ण सुझाव देकर, इस खूबसूरत संकलन को और खूबसूरत बनाने में हमारी मदद अवश्य करेंगे !

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