क्या आपको पता है, दैनिक पूजा पाठ करने में ध्यान देने वाली ये महत्वपूर्ण बातें?

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Daily Puja Path Vidhi

ईश्वर से ही सृष्टि है, वही पालक है तथा वही विनाशक भी. किसी भी इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की यात्रा का हर कदम ईश्वर के अनुसार चलता है। ईश्वर पर विश्वास ही किसी भी धर्म की नींव भी है। वैदिक परंपरा के अनुसार हर घर में मंदिर का होना तथा नित्य रूप से पूजा पाठ का होना जरूरी बताया गया है। सुखी और समृद्धिशाली जीवन के लिए घर में नित्य देवी-देवताओं के पूजन की परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही है। ऐसा विश्वास है की दैनिक रूप से पूजा पाठ करने से घर में सुख, शान्ति एवं समृद्धि आती है तथा हमे मानसिक शांति मिलती है एवं हमारा चित्त प्रसन्न रहता है। हमारे वैदिक धर्म में पूजा पाठ सम्बंधित कई निर्देश दिए गए हैं जिनका ध्यान हमें दैनिक पूजा पाठ दौरान अवश्य रखना ही चाहिए।

चलिए जानते हैं, दैनिक पूजा पाठ करने में ध्यान देने वाली वे खास बातें जिनका ध्यान हमें अवश्य रखना ही चाहिए…!

(1) किसी भी पूजा पाठ में कभी भी खंडित चावलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, वह अखंडित हों अर्थात टूटे हुए न हों। यदि चावल हल्दी में अथवा पिले रंग में रंगे हुए हो, तो उसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

(2) कभी भी किसी भी धार्मिक कार्य के लिए किसी खंडित वस्तु, जैसे टूटे दीपक इत्यादि का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

(3) घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियों को कुछ इस तरह स्थापित करें कि मूर्तियों का मुख एक दूसरे के सामने ना हो।

(4) घर में मंदिर को ऐसी जगह स्थापित किया जाना चाहिए जहां ताजी हवा और सूरज की रोशनी पहुंचती हो।

(5) पूजा करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होना चाहिए। मंदिर और देवी-देवताओं की मूर्ति के सामने कभी भी पीठ दिखाकर नहीं बैठना चाहिए।

(6) घर में मंदिर स्थान पर नित्य रूप से पोंछा अवश्य लगाएं तथा साफ़ सफाई का ध्यान रखें।

(7) अगर आप घी का दीपक जला रहे हैं तो उसमें सफेद रूई की बत्ती का उपयोग करें, वहीं अगर आप तेल का दीपक जलाते हैं तो लाल रंग की बत्ती उपयुक्त रहती है।

(8) दैनिक पूजा के दौरान लगाया जाने वाला दीपक भगवान की मूर्ति के ठीक सामने होना चाहिए। जबकि नवरात्र पूजा में घी का दीपक हमेशा कलश के दाएं तथा तील के तेल का दीपक कलश के बाएं होना चाहिए। दीपक को किसी दूसरी दिशा या इधर-उधर लगाना सही नहीं है।

(9) जिस आसन पर बैठकर हम पूजा करते हैं, उसे कभी भी अपने पैरों से नहीं खिसकाना चाहिए।

(10) पूजा स्थल के पास अथवा अगल बगल या ऊपर किसी प्रकार का कबाड़ कदापि ना रखें।

(11) पूजन स्थल की पवित्रता का हमेशा ध्यान रखें, चप्पल या फिर चमड़े की किसी वस्तु को पूजा स्थल में प्रवेश ना दें।

(12) प्लास्टिक की बोतल में या किसी अपवित्र धातु के बर्तन में गंगाजल नहीं रखना चाहिए। गंगाजल तांबे के बर्तन में रखना शुभ रहता है।

(13) देवी-देवताओं को चढ़ाए जाने वाले फूल-पत्तियों को साफ पानी से अवश्य धो लें।

(14) सनातन धर्म में पंचदेव यानि गणेश, सूर्य, दुर्गा, शिव और विष्णु देव का उल्लेख किया गया है। किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले पंचदेव का ध्यान अवश्य करना चाहिए। प्रतिदिन की जाने वाली पूजा के दौरान भी इन पंचदेव का ध्यान करना सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

(15) शिवजी, गणेशजी और भैरवजी को कभी भी तुलसी (तुलसी पत्र) नहीं चढ़ानी चाहिए।

(16) मां दुर्गा को दूर्वा (एक प्रकार की घास) नहीं चढ़ानी चाहिए। अपितु यह गणेशजी को विशेष रूप से अर्पित की जाती है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें की दूर्वा रविवार को कदापि नहीं तोडऩी चाहिए।

(17) सूर्य देव को कभी भी शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

(18) तांबे के बर्तन में चंदन, घिसा हुआ चंदन या चंदन का पानी नहीं रखना चाहिए।

(19) तुलसी जी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं।

(20) रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

(21) स्त्रियों को और अपवित्र अवस्था में पुरुषों को कभी भी शंख नहीं बजाना चाहिए। ऐसा न करने पर उस स्थान से देवी लक्ष्मी चली जाती हैं।

(22) मां लक्ष्मी की पूजा में उन्हें विशेष रूप से कमल का फूल अर्पित किया जाना चाहिए।

(23) बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।

(24) भगवान शिव को कभी हल्दी तथा शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए। वहीँ शिवजी की पूजा में उन्हें बिल्वपत्र जरूर अर्पित करें तथा ये ध्यान दे की बिल्वपत्र कटे हुए न हो तथा एक साथ तीन के समूह में हों।

(25) शास्त्रों के अनुसार शिवजी को प्रिय बिल्व पत्र छह माह तक बासी नहीं माने जाते हैं। अत: पहले से तोड़ कर रखे बिल्वपत्रों को जल छिड़क कर पुन: शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।

(26) तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। अत: पहले से तोड़ कर रखे तुलसी जी के पत्तों को जल छिड़क कर पुन: पूजा में प्रयोग में ला सकते है।

(27) आमतौर पर फूलों को हाथों में रखकर हाथों से भगवान को अर्पित किया जाता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। फूल चढ़ाने के लिए फूलों को किसी पवित्र पात्र में रखना चाहिए और इसी पात्र में से लेकर देवी-देवताओं को अर्पित करना चाहिए।

(28) पूजाघर में मूर्तियाँ 1 ,3 , 5 , 7 , 9 ,11 इंच तक की होनी चाहिए, इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी,सरस्वतीजी, लक्ष्मीजी, की मूर्तियाँ घर में नहीं होनी चाहिए।

(29) गणेश या देवी की प्रतिमा तीन तीन, शिवलिंग दो,शालिग्राम दो,सूर्य प्रतिमा दो,गोमती चक्र दो की संख्या में कदापि न रखें।

(30) हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति दीपक से दीपक जलते हैं, वे रोगी होते हैं।

(31) घर के मंदिर में सुबह एवं शाम को घी का दीपक अवश्य जलाएं।

(32) पूजन-कर्म और आरती पूर्ण होने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर 3 परिक्रमाएं अवश्य करनी चाहिए।

(33) भगवान की आरती करते समय ध्यान रखें ये बातें- भगवान के चरणों की चार बार आरती करें, नाभि की दो बार और मुख की एक या तीन बार आरती करें। इस प्रकार भगवान के समस्त अंगों की कम से कम सात बार आरती करनी चाहिए।

(34) शास्त्रों के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित की गई है। जो भी मूर्ति खंडित हो जाती है, उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है। इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि सिर्फ शिवलिंग कभी भी, किसी भी अवस्था में खंडित नहीं माना जाता है।

(35) मंदिर के ऊपर भगवान के वस्त्र, पुस्तकें एवं आभूषण आदि भी न रखें मंदिर में पर्दा अति आवश्यक है अपने पूज्य माता –पिता तथा पित्रों का फोटो मंदिर में कदापि न रखें,उन्हें घर के नैऋत्य कोण में स्थापित करें।

(36) शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं का पूजन दिन में पांच बार करना चाहिए। सुबह 5 से 6 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में पूजन और आरती होनी चाहिए। इसके बाद प्रात: 9 से 10 बजे तक दूसरी बार का पूजन। दोपहर में तीसरी बार पूजन करना चाहिए। इस पूजन के बाद भगवान को शयन करवाना चाहिए। शाम के समय चार-पांच बजे पुन: पूजन और आरती। रात को 8-9 बजे शयन आरती करनी चाहिए। जिन घरों में नियमित रूप से पांच बार पूजन किया जाता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है और ऐसे घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।

अगर आप उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर पूरी श्रद्धा से पूजा करते हैं तो ईश्वर आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य ही पूर्ण करते हैं ! जय माता दी ! हर हर महादेव !

हम उम्मीद करते हैं की, हमारा ये संकलन आपको बेहद पसंद आया होगा ! और यदि आप हमे कोई सुझाव देना चाहते हैं अथवा हमसे कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से दे अथवा पूछ सकते हैं ! धन्यवाद् !!

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नमस्कार...!! इस खूबसूरत संकलन को आपलोगों के समक्ष ज्ञानवाटिका संपादन टीम के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके प्रधान सम्पादक और एडमिन विकास कुमार तिवारी जी हैं. इस खूबसूरत संग्रह को बनाने और आपके समक्ष लाने में कई दिन और कई रातों का सतत प्रयास शामिल है, और हम आगे भी इसी निष्ठा से आपके समक्ष महत्वपूर्ण तथा अनमोल जानकारियों को संकलित कर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं...! इसके साथ ही हम इस बात के लिए भी आशान्वीत हैं की आप सभी अपना महत्वपूर्ण सुझाव देकर, इस खूबसूरत संकलन को और खूबसूरत बनाने में हमारी मदद अवश्य करेंगे !

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