विश्व के 7 आश्चर्य कौन कौन से हैं तथा ये कहां हैं?

0
803
Know about seven wonders of the world

दुनियाँ के सात अजूबे क़रीब 2200 साल पहले निर्धारित हुए थें, जिनमे से अब मात्र एक ‘द ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गीजा’ शेष है! इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 2001 में स्विस कारपोरेशन न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन ने दुनिया भर में 200 स्मारकों के बीच 7 सर्वश्रेष्ठ स्मारकों को चुनने कि एक मुहिम चलायी और लिस्बन में 7 जुलाई, 2007 को दुनिया के 7 अजूबे की घोषणा की गयी। जो निम्नलिखित हैं।

(1) चिचेन इत्जा में पिरामिड (The pyramid at Chichen Itza)
दुनिया के 7 अजूबों में से यह पहला अजूबा है। चिचेन इत्जा आज के मैक्सिको, अमेरिका में स्थित बहुत पुराना माया मंदिर है जिसे पुरानी माया सभ्यता का अवशेष माना जाता है। इसका निर्माण 600 AD हुआ था और माया सभ्यता यहाँ पर 750 से 1200 सदी के बीच फली-फूली और यह शहर इनकी राजधानी और धर्मिक नगरी थी जिसका नाम “चिचेन इत्जा” था तथा यह माया का सबसे बड़ा शहर भी था !

Chichen Itza

मैक्सिको में बसा चिचेन इत्जा सबसे पुराने पुरातात्विक स्थलों में से एक है, जहाँ हर वर्ष 1.4 मिलियन पर्यटक घूमने आते हैं ! चिचेन इत्जा का माया मंदिर लगभग 5 किलो मीटर में फैला हुआ है,जो की लगभग 79 फीट ऊँचा और पत्थरों से बना हुआ पिरामिड के आकार में है ! इस सीढ़ीदार पिरामिड का आधार चौकोर है और चारों ओर से शीर्ष पर स्थिति मंदिर के लिए हर तरफ 91 सीढ़ियां हैं। हर सीढ़ी एक दिन का प्रतीक है और मंदिर 365वां दिन का। वसंत और शरद के विषुव में, सूर्य के उदय और अस्त होने पर, यह संरचना उत्तर की सीढ़ी के पश्चिम में एक पंखदार सर्प की छाया निर्मित करती है : कुकुल्कन, या क्वेत्ज़लकोटल. इन दो वार्षिक अवसरों पर, इन कोनों की छाया सूरज की हरकत के साथ पिरामिड के उत्तर ओर गिरती है जो सर्प के सिर तक जाती है।

(2) क्राइस्ट द रिडीमर (Christ the Redeemer)
ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में स्थापित यह ईसा मसीह की एक प्रतिमा है जिसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आर्ट डेको स्टैच्यू माना जाता है। यह प्रतिमा अपने 9.5 मीटर (31 फीट) आधार सहित 39.6 मीटर (130 फ़ुट) लंबी और 30 मीटर (98 फ़ुट) चौड़ी है। इसका वजन 635 टन (700 शॉर्ट टन) है और तिजुका फोरेस्ट नेशनल पार्क में कोर्कोवाडो पर्वत की चोटी पर स्थित है। 700 मीटर (2,300 फ़ुट) जहाँ से पूरा शहर दिखाई पड़ता है।

Christ the Redeemer

यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे ऊँची मूर्तियों में से एक है (बोलीविया के कोचाबम्बा में स्थित क्राइस्टो डी ला कोनकोर्डिया की प्रतिमा इससे थोड़ी अधिक ऊँची है)। ईसाई धर्म के एक प्रतीक के रूप में यह प्रतिमा रियो और ब्राजील की एक पहचान बन गयी है। यह मजबूत कांक्रीट और सोपस्टोन से बनी है, इसका निर्माण 1922 और 1931 के बीच किया गया था।

(3) कोलोसियम या कोलिसियम (Colosseum)
यह इटली देश के रोम नगर के मध्य निर्मित रोमन साम्राज्य का एक विशाल स्टेडियम / एलिप्टिकल एंफ़ीथियेटर है, जिसका असली लेटिन नाम ‘एम्फीथिएटरम्‌ फ्लावियम’ है, जिसे अंग्रेजी में ‘फ्लावियन एम्फीथिएटर’ कहा जाता है, लेकिन यह कोलोजियम के नाम से ही ज़्यादा प्रसिद्घ है। यह रोमन स्थापत्य और अभियांत्रिकी का सर्वोत्कृष्ट नमूना माना जाता है। इसका निर्माण तत्कालीन शासक वेस्पियन ने 70वीं – 72वीं ईस्वी के मध्य प्रारंभ किया और 80वीं ईस्वी में इसको सम्राट टाइटस ने पूरा किया।

Colosseum

अंडाकार आकृति में बने इस कोलोसियम की क्षमता उस वक़्त 50,000 दर्शकों की थी, जो अपने आप में असाधारण बात थी। इस स्टेडियम में योद्धाओं के बीच मात्र मनोरंजन के लिए खूनी लड़ाईयाँ हुआ करती थीं। योद्धाओं को जानवरों से भी लड़ना पड़ता था। ग्लेडियेटर बाघों से लड़ते थे। अनुमान है कि इस स्टेडियम के ऐसे प्रदर्शनों में लगभग 5 लाख पशुओं और 10 लाख मनुष्य मारे गए। इसके अतिरिक्त पौराणिक कथाओं पर आधारित नाटक भी यहाँ खेले जाते थे। यह आज भी शक्तिशाली रोमन साम्राज्य के वैभव का प्रतीक है, और पर्यटकों का सबसे लोकप्रिय गंतव्य है ! यह रोमन चर्च से निकट संबंध रखता है क्यों कि आज भी हर गुड फ्राइडे को पोप यहाँ से एक मशाल जलूस निकालते हैं।

(4) चीन की महान दीवार (Great Wall of China)
चीन की यह दीवार संसार की सबसे लम्बी मानव निर्मित रचना है। जो लगभग 4000 मील (6,400 किलोमीटर) तक फैली है ! किले के समान बनी यह दिवार लगभग 35 फ़ीट ऊँची है, तथा यह इतनी चौड़ी है की इस पर एक साथ करीब 15 लोग चल सकते हैं ! यह दीवार चीन की उत्तरी सीमा पर बनाई गयी थी ताकि मंगोल आक्रमणकारियों को रोका जा सके। इसे बनाने की शुरुआत 5वीं सदी ईसा पूर्व में हुई थी तथा यह 16 वीं सदी तक बनती रही। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मानव निर्मित ढांचे को अन्तरिक्ष से भी देखा जा सकता है।

The Great Wall of China

(5) माचू पिचू (Machu Picchu)
माचू पिचू, दक्षिण अमेरिकी देश पेरू मे स्थित एक कोलम्बस-पूर्व युग, इंका सभ्यता से संबंधित एक ऐतिहासिक स्थल है। इसके नाम का अर्थ है :- ‘पुरानी चोटी।” यह कुज़्को से 80 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में समुद्र तल से 2,430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबाम्बा घाटी (जिसमे से उरुबाम्बा नदी बहती है) के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित है। इसे “इंकाओं का खोया शहर“ भी कहा जाता है।

Machu Picchu

पुरातत्वविदों का मानना है की ‘माचू पिचू’ का निर्माण इंकाओं के तत्कालीन राजा पचाकुति ने 1430 ई. के आसपास अपने शासकों के आधिकारिक स्थल के रूप में शुरू किया था, लेकिन इसके लगभग सौ साल बाद, जब इंकाओं पर स्पेनियों ने विजय प्राप्त कर ली तो इसे यूँ ही छोड़ दिया गया। हालांकि स्थानीय लोग इसे शुरु से जानते थे पर सारे विश्व को इससे परिचित कराने का श्रेय हीरम बिंघम को जाता है जो एक अमेरिकी इतिहासकार थे और उन्होने इसकी खोज 1911 में की थी, तब से माचू पिच्चू एक महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण बन गया है।

माचू पिच्चू को 1981 में पेरू का एक ऐतिहासिक देवालय घोषित किया गया और 1983 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल की दर्जा दिया गया। क्योंकि इसे स्पेनियों ने इंकाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद भी नहीं लूटा था, इसलिए इस स्थल का एक सांस्कृतिक स्थल के रूप में विशेष महत्व है और इसे एक पवित्र स्थान भी माना जाता है।

(6) पेत्रा (Petra)
अरब के रेगिस्तान के कोने में बसा, साउथ जॉर्डन के मआन प्रान्त में स्थित ‘पेत्रा’ एक ऐतिहासिक नगरी है जो अपने पत्थर से तराशी गई इमारतों और पानी वाहन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। इसे छठी शताब्दी ईसापूर्व में नबातियों ने अपनी राजधानी के तौर पर स्थापित किया था। माना जाता है कि इसका निर्माण कार्य 1200 ईसापूर्व के आसपास शुरू हुआ। आधुनिक युग में यह एक मशहूर पर्यटक स्थल है। पेत्रा एक “होर” नामक पहाड़ की ढलान पर बसा हुआ है और पहाड़ों से घिरी हुई एक द्रोणी में स्थित है। यह पहाड़ मृत सागर से अक़ाबा की खाड़ी तक चलने वाली “वादी अरबा” नामक घाटी की पूर्वी सीमा हैं। पेत्रा को युनेस्को द्वारा एक विश्व धरोहर होने का दर्जा मिला हुआ है। बीबीसी ने अपनी “मरने से पहले ४० देखने योग्य स्थान” में पेत्रा को भी शामिल किया हुआ है।

Petra

(7) ताजमहल (Taj Mahal)
‘ताजमहल’ दुनिया के 7 अजूबे में से एक तथा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है। इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। इसकी नींव सन् 1632 में रखी गयी थी और यह 15 वर्षों में बनकर सन् 1647 के लगभग पूरा हुआ था। ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् 1973 में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है।

Tajmahal

हम उम्मीद करते हैं की आपको हमारा ये संकलन पसंद आया होगा ! और यदि आप हमे कोई सुझाव देना चाहते हैं अथवा हमसे कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से दे अथवा पूछ सकते हैं ! धन्यवाद् !!

SHARE
Previous articleशादीशुदा ज़िन्दगी को खुशनुमा बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण सलाह !
Next articleअत्यंत खूबसूरत और रोमांचक है, पहाड़ों की रानी ‘दार्जिलिंग’ !
नमस्कार...!! इस खूबसूरत संकलन को आपलोगों के समक्ष ज्ञानवाटिका संपादन टीम के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके प्रधान सम्पादक और एडमिन विकास कुमार तिवारी जी हैं. इस खूबसूरत संग्रह को बनाने और आपके समक्ष लाने में कई दिन और कई रातों का सतत प्रयास शामिल है, और हम आगे भी इसी निष्ठा से आपके समक्ष महत्वपूर्ण तथा अनमोल जानकारियों को संकलित कर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं...! इसके साथ ही हम इस बात के लिए भी आशान्वीत हैं की आप सभी अपना महत्वपूर्ण सुझाव देकर, इस खूबसूरत संकलन को और खूबसूरत बनाने में हमारी मदद अवश्य करेंगे !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here