भारत का तीसरा गेट, सभ्यता द्वार (गेटवे ऑफ़ बिहार) !

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Sabhyata Dwar (The Gateway of Bihar)

सभ्यता द्वार (गेटवे ऑफ़ बिहार), जिसे अब भारत का तीसरा गेट भी कह सकते हैं ! यह मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया और नई दिल्ली के इंडिया गेट की तर्ज पर पटना में गंगा नदी के तट पर बना हैं ! जिसका नाम है, सभ्यता द्वार (Sabhyata Dwar) जिसका उद्घाटन अभी कुछ ही दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री माननीय श्री नितीश कुमार जी के द्वारा किया गया तथा अब यह का आम लोगों के दीदार के लिए खोल दिया गया है।

बिहार के पुराने गौरवशाली इतिहास को जानने और समझने के लिए एवं बिहारवासियों के लिए एक नए तोहफे के रूप में पटना में गांधी मैदान के उतरी किनारे की ओर गंगा नदी के किनारे बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने सभ्यता द्वार का निर्माण किया है. यह नई दिल्ली के इंडिया गेट और मुम्बई के गेटवे ऑफ इंडिया के तर्ज पर बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई 32 मीटर (गेटवे ऑफ़ इंडिया से 6 मीटर ऊंचा) एवं चौड़ाई 8 मीटर है ! पटना में गंगा नदी के तट पर बना यह विशाल “सभ्यता द्वार” पाटलिपुत्र की समृद्ध सभ्यता का अहसास करा रहा है।

सभ्यता द्वार ने सदियों की गौरवगाथा को अपने आप में समेटा हुआ है. इस द्वार पर जैन तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर के संदेश लिखे हैं तो सारी दुनिया को प्रतीत्य समुत्पाद और मध्यमप्रतिपदा से परिचित करानेवाले बुद्ध के संदेश भी अंकित हैं. पहली बार विशाल एकीकृत भारत को साकार करनेवाले चंद्रगुप्त मौर्य भी हैं तो बौद्ध धर्म को देश-दुनिया में फैलानेवाले महान सम्राट अशोक के संदेश भी हैं ! साथ ही इसके शीर्ष पर गौरवशाली अशोक स्तम्भ बना हुआ है !अनगिनत शासकों का केंद्र रहे, भारत के ऐतिहासिक शहर पटना में गंगा किनारे खड़ा यह विशाल सभ्यता द्वार लोगों को बिहार की गौरवगाथा सुनाने और बताने को अब तैयार है.

गांधी मैदान के उत्तर और अशोका इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर परिसर के पीछे बना यह भव्य द्वार अन्य कई मायनों में खास है। मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया (26 मीटर) से 6 मीटर ऊंचा होने के साथ साथ यह पटना के गोलघर (29 मीटर) से भी 3 मीटर अधिक ऊँचा है। सभ्यता द्वार के सबसे ऊपर बौद्ध स्तूप की आकृति बनाई गई है। सभ्यता द्वार में दो छोटा और एक बड़ा द्वार है। द्वार के चारों ओर आकर्षक रोशनी, गार्डनिंग, लैंड स्केपिंग और गंगा मेरीन ड्राइव इसे भव्य रूप प्रदान करेंगे। लाल और सफेद सैंड स्टोन से निर्मित इस द्वार के सबसे ऊपर चारों दिशाओं में मिश्रित धातु से शेर का प्रतीक चिह्न लगाया गया है।

साथ ही सभ्यता द्वार पर यूनान के राजदूत और इंडिका पुस्तक के लेखक मेगास्थनीज के संदेश लिखे गए हैं। अपनी पुस्तक में मेगास्थनीज ने पाटलिपुत्र का बहुत ही सुंदर और विस्तृत वर्णन किया है। मेगास्थनीज ने लिखा है कि पाटलिपुत्र भारत का सबसे बड़ा नगर है। यह नगर गंगा और सोन के संगम पर बसा है। इसकी लंबाई साढ़े नौ मील और चौड़ाई पौने दो मील है। नगर के चारों ओर एक दीवार है जिनमें अनेक फाटक और दुर्ग बने हैं। नगर के अधिकतर मकान लकड़ी के बने हैं। इस तरह करीब 2500 वर्ष पूर्व के नगर की भव्यता का वर्णन इंडिका में किया गया है।

सभ्यता द्वार ज्ञान भवन और बापू सभागार प्रोजेक्ट का हिस्सा है। जिसकी कुल लागत 590 करोड़ रुपये है। करीब एक एकड़ एरिया में सभ्यता द्वार और आसपास का परिसर फैला हुआ है। इसे बनाने में डेढ़ साल का समय लगा है। परिसर में ही सम्राट अशोक की भव्य मूर्ति लगाई गई है, साथ ही दर्शकों के बैठने की भी समुचित व्यवस्था है। इसे और खूबसूरती देने के लिए जमीन पर एलईडी सीरीज लाइट से आकर्षक रोशनी दी गयी है। संबंधित अधिकारियों के अनुसार आनेवाले समय में “सभ्यता द्वार” बिहार के महत्वपूर्ण पर्यटक केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।

गांधी संग्रहालय के प्रमुख डॉ रजी अहमद ने बताया कि पटना के ही निवासी चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ रहे एसके सिन्हा ने सबसे पहले यह प्रस्ताव तैयार कर सरकार को दिया था। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सत्ता में आए तब एसके सिन्हा ने उनसे मिलकर यह प्रस्ताव सौंपा था जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया था। एसके सिन्हा ने जो प्रस्ताव तैयार किया था उसमें द्वार का नाम सम्राट अशोक के नाम पर रखने का सुझाव दिया था। साथ ही ब्लू प्रिंट और नक्शा भी बनाया था। इसमें सम्राट अशोक से लेकर शेरशाह तक की ऐतिहासिक विरासत को समेटा गया था। बाद में इसे अशोक द्वार के बदले सभ्यता द्वार का नाम दिया गया।

पाटलिपुत्र साम्राज्य का गौरव सामने आए और शेरशाह तक की विरासतों को लोग समझ सकें, यही इस सभ्यता द्वार का प्रमुख मकसद है। गंगा किनारे का यह क्षेत्र सम्राट अशोक के समय परिवहन का प्रमुख मार्ग था। सम्राट अशोक ने जब धम्म विजय की शुरुआत की तब अपने बेटे महेन्द्र को महेन्द्रू घाट से श्रीलंका में प्रचार-प्रसार के लिए भेजा था। इसे आज भी महेन्द्रू घाट के नाम से लोग जानते हैं। महेंद्रू से यह करीब 500 मीटर की दुरी पर स्थित है।

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नमस्कार...!! इस खूबसूरत संकलन को आपलोगों के समक्ष ज्ञानवाटिका संपादन टीम के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके प्रधान सम्पादक और एडमिन विकास कुमार तिवारी जी हैं. इस खूबसूरत संग्रह को बनाने और आपके समक्ष लाने में कई दिन और कई रातों का सतत प्रयास शामिल है, और हम आगे भी इसी निष्ठा से आपके समक्ष महत्वपूर्ण तथा अनमोल जानकारियों को संकलित कर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं...! इसके साथ ही हम इस बात के लिए भी आशान्वीत हैं की आप सभी अपना महत्वपूर्ण सुझाव देकर, इस खूबसूरत संकलन को और खूबसूरत बनाने में हमारी मदद अवश्य करेंगे !

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