अगर गंगा को बचाना है, तो आइये मिलकर पेड़ लगाएं !

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Save Ganga, Save India

जी हाँ, हम सब जानते हैं की प्रदुषण, विकास के नाम पर गंगा का अतिक्रमण और अंततः भारतीय राजनीति के विकास के कुचक्र में पीसकर मोक्षदायनी माँ गंगा स्वयं मोक्ष की ओर अग्रसर हो चुकी है, ऐसे में अगर गंगा को बचाना है, तो आइये मिलकर पेड़ लगाएं ! हमारे द्वारा किया गया ये प्रयास शायद मोक्षदायनी को जीवन दे दे, वरना आनेवाले समय में शायद गंगा बचाने के लिए 1947 से लेकर 2018 तक शुरू की गयी तमाम परियोजनाएं, मंत्रालय और हजारों करोड़ खर्च किये गए रुपयों का परिणाम गंगा के आस्तित्व की समाप्ति के रूप में भारत में उभरेगा !

जी हाँ ये एक कटु सत्य है, और पेड़ों को लगाकर हम गंगा को बचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं ! आज का हमारा ये लेख विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण और गंगा को बचाने के लिए हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा प्रयास है तथा इसमें हमारे मित्र श्री विवेक कुमार मिश्रा जी का महत्वपूर्ण योगदान है !

तो आइये जानते हैं, कैसे पेड़ों को लगाकर हम गंगा को बचा सकते हैं!

यह जानने और समझने के लिए हमे सर्वप्रथम गंगा के स्वरुप को समझना होगा ! गंगा का व्यवहार पहाड़ों पर अलग और मैदानों में अलग होता है। मैदानों मे गंगा अक्सर कई सहायक नदियों से मिलती हैं और जलजमाव का बड़ा क्षेत्र बनाते हुए आगे बढ़ती हैं। इस क्षेत्र को बेसिन कहते हैं। बेसिन सामान्य तल से नीचा होता है और गहराई लिए होता है। इसीलिए जहाँ पहाड़ों पर गंगा मे छिछलापन और वेग होता है वहीं इसके उलट मैदानों मे ये गहरी और कम वेगवान हो जाती हैं। मैदानों मे गहरी होने का मतलब ये हुआ कि जो भी रेत मिट्टी या बालू ये पीछे से लेकर आती है, वो इन्ही बेसिन में जमा होता रहता है। इस वजह से बेसिन की गहराई कम होती जाती है और गंगा के किनारे के इलाके जलमग्न होते जाते हैं। गंगा के किनारे के तटबंध भी इसी वजह से टूट जाते हैं। तो सवाल ये उठता है कि फिर गंगा अपना स्वरूप बचाए कैसे रखती है?

सबसे पहली बात, प्रकृति इसका हल सुझाती है। गंगा के किनारों पर घने पेड़ों का झुरमुट असल में तटों की मिट्टी को कस कर बाँधे रहता है, जिससे तट नही कट पाते और गंगा अपना नैसर्गिक मार्ग बनाए रखती हैं। वहीं दूसरी और पेड़ों की उपस्थिति गंगा से सींच कर भूगर्भ जल का स्तर बनाए रखते हैं और वर्षा को आकर्षित कर तटीय इलाकों की पारिस्थितिकी साम्यता को भी बनाए रखते हैं।

दूसरी तरफ तटीय आबद्ध गंगा अपने प्रवाह के वेग से बेसिन में जमने वाली रेत मिट्टी को भी बहाती रहती है और अधिक निचले इलाकों में जमा करती रहती है। खासकर वहाँ जहाँ प्राकृतिक तटीय बंध यानि पेड़ों की कतारें मौजूद नही है। ये भी एक प्राकृतिक योजना का ही हिस्सा है। यहीं से हम रेत प्राप्त करते हैं। हम रेत लेते जाते हैं और गंगा जमाती जाती हैं।

अब हमने ये किया कि जहाँ तहाँ हरियाली को नष्ट करते गए। मतलब गंगा के किनारे के इलाकों से भी। इसने तटों को तोड़ा और रेत का जमाव यहां होने लगा। अब जहाँ रेत पहुँचनी चाहिए वहाँ नही पहुँच रही है और बेसिन में टीलों की शक्ल लेकर उभरती जा रही है। और ऐसे में बेसिन में छिछलापन, गर्मियों का मौसम और रेत के टीलों ने ही गंगा के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है।

अब पहला कदम ये कि गंगा के मैदानी इलाकों में तटों पर घनी हरियाली की जाए और तटों को पुन: स्थापित किया जाए, और इसके लिए हमे अधिकाधिक मात्रा में पेड़ों को लगाना होगा। और इसकी वजह से गंगा अपना मार्ग पुन: पकड़ लेगी और साथ ही सरकार को भी बेसिन से बालू का निष्कासन सुनिश्चित करना होगा। जिससे बेसिन मे जलजमाव और प्रवाह बना रहे। इसके अलावां गंगा में प्रदूषण को रोकने के लिए गंगा में नालों और रसायनों का प्रवाह बंद करना व बांधों में जल संचयन को भी प्रबंधित करना दूसरे चरण का हिस्सा होना चाहिए।

तब कही जाकर पतित पावनी माँ गंगा पतितों को पावन करने के लिए जीवित रहेगी। हम नहीं जानते की हमारा योगदान किस हद तक सार्थक होगा लेकिन पर्यावरण और गंगा को बचाने के लिए अगर हमने दिल से ठान लिया तो हम इतने पेड़ तो लगा ही लेंगे की कुछ हद तक पर्यावरण को दूषित होने से रोक लें और गंगा के आस्तित्व को बचाने में अपना छोटा सा योगदान दे सकें !

हम उम्मीद करते हैं, की आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमारे द्वारा पेश किया गया ये संकलन आप सभी को बहुत पसंद आएगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हमारा ये छोटा सा योगदान सार्थक बनेगा ! यदि आप हमे कोई सुझाव देना चाहते हैं अथवा हमसे कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से दे अथवा पूछ सकते हैं ! धन्यवाद् !!

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नमस्कार...!! इस खूबसूरत संकलन को आपलोगों के समक्ष ज्ञानवाटिका संपादन टीम के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके प्रधान सम्पादक और एडमिन विकास कुमार तिवारी जी हैं. इस खूबसूरत संग्रह को बनाने और आपके समक्ष लाने में कई दिन और कई रातों का सतत प्रयास शामिल है, और हम आगे भी इसी निष्ठा से आपके समक्ष महत्वपूर्ण तथा अनमोल जानकारियों को संकलित कर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं...! इसके साथ ही हम इस बात के लिए भी आशान्वीत हैं की आप सभी अपना महत्वपूर्ण सुझाव देकर, इस खूबसूरत संकलन को और खूबसूरत बनाने में हमारी मदद अवश्य करेंगे !

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