जानिये मौर्य काल के समय से एशिया भर के लोगों को आकर्षित करते आ रहे विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला को !

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Sonpur Cattle Fair | The largest Cattle Fair of Asia

बिहार के छपरा (सारण) जिले के सोनपुर में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले का आगाज 2 नवम्बर 2017 को हो चूका है, सोनपुर मेला बिहार के सारण जिले के सोनपुर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर) में लगता हैं। यह एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला भी कहा जाता हैं। मेले को ‘हरिहरक्षेत्र मेला’ के नाम से भी जाना जाता है जबकि स्थानीय लोग इसे ‘छत्तर मेला’ के नाम से जानते हैं 

मोक्षदायिनी माँ गंगा और गंडक नदी के विशालकाय संगम तट और बिहार के सारण तथा वैशाली जिले के सीमा पर बसे ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व वाले बाबा हरिहरनाथ सोनपुर क्षेत्र में लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला बिहार के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक रहा है। इस मेले में कभी अफगान, इरान, इराक जैसे देशों के लोग पशुओं की खरीदारी करने आया करते थे। कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने भी इसी मेले से बैल, घोड़े, हाथी और हथियारों की खरीदारी की थी. 1857 की लड़ाई के लिए बाबू वीर कुंवर सिंह ने भी यहीं से अरबी घोड़े, हाथी और हथियारों का संग्रह किया था ।

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के दो भक्त जय और विजय शापित होकर हाथी (गज) और मगरमच्छ (ग्राह) के रूप में धरती पर उत्पन्न हुए थे। एक दिन कोनहारा के तट पर जब गज पानी पीने आया था तो ग्राह ने उसे पकड़ लिया था ! फिर गज ग्राह से छुटकारा पाने के लिए कई सालों तक लड़ता रहा, तब गज ने बड़े ही मार्मिक भाव से अपने हरि यानी विष्णु को याद किया। तब कार्तिक पूर्णिमा के दिन विष्णु भगवान ने उपस्थित होकर सुदर्शन चक्र चलाकर उसे ग्राह से मुक्त किया और गज की जान बचाई। इस मौके पर सारे देवताओं ने यहां उपस्थित होकर जयजयकार की थी ।

इस स्थान के बारे में कई धर्मशास्त्रों में चर्चा की गई है। हिंदू धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से सौ गोदान का फल प्राप्त होता है। कहा तो यह भी जाता है कि कभी भगवान राम भी यहां पधारे थे और बाबा हरिहरनाथ की पूजा-अर्चना की थी। इसी तरह सिख ग्रंथों में यह जिक्र है कि गुरु नानक यहां आए थे। बौद्ध धर्म के अनुसार अंतिम समय में भगवान बुद्ध इसी रास्ते कुशीनगर गए थे। जहां उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। ऐसे और भी न जाने कितने इतिहास यह अपने आप में समेटे हुए है !

सोनपुर की इस धरती पर हरिहरनाथ मंदिर दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां हरि (विष्णु) और हर (शिव) की एकीकृत मूर्ति है। इसके मंदिर के बारे में कहा जाता है कि कभी ब्रह्मा ने इसकी स्थापना की थी। इसके साथ ही संगम किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली की मूर्ति में शुंग काल का स्तंभ है। कुछ मूर्तियां तो गुप्त और पाल काल की भी हैं !

ये मेला सोनपुर से हाजीपुर में नदी किनारे कई किलोमीटर लंबा होता है. यह मेला गंगा और गंडक नदी के संगम पर लगता है जहां कभी गज (हाथी विष्णु का भक्त) और ग्राह में भयंकर युद्ध हुआ था. ऐसी मान्यता है कि गज को बचाने के लिए विष्णु स्वयं यहां आए थे. इसलिए ये हरिहर क्षेत्र है. इस मेले की खासियत यह है की यहाँ सुई से लेकर हाथी तक सब कुछ बिकता है, मेले के आकर्षण में एक से एक नयी गाड़ियाँ, देश विदेश के हर कोने से आये हस्तशिल्प, अलग अलग राज्यों के पकवान और खाने वाले व्यंजन, विश्व प्रशिद्ध कैबरे एवं थियेटर्स, अलग अलग किस्म के पशु एवं पक्षी, दिल्ली और लखनऊ का प्रशिद्ध मीना बाजार, सर्कस, जादूगर के खेल, चिड़िया बाजार, हाथी बाजार और हर पशु के लिए अलग बाजार, घोड़े की दौर प्रतियोगिता, बॉलीवुड के प्रमुख कलाकारों द्वारा आयोजित किये जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम और बहुत कुछ प्रमुख हैं. ये मेला 30 – 45 दिनों का होता है, जिसे देश विदेश के करोड़ों पर्यटक देखने आते हैं ।

सोनपुर मेला में कैसे पहुंचे !
सोनपुर रेल, सड़क और हवाई मार्ग से सभी से जुड़ा है, यदि आप डायरेक्ट रेल से यहीं आना चाहते हैं तो आप सीधे सोनपुर जंक्शन पहुंच सकते हैं इसके अलावा यह हाजीपुर, छपरा, पाटलिपुत्र, दानापुर और पटना जंक्शन से भी बहुत करीब और जुड़ा हुआ है तो आप अपनी सुविधानुसार रेलवे जंक्शन का चुनाव कर रेल से यहाँ आसानी से पहुंच सकते हैं । यदि आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो यहां से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना है जो भारत की सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है ।सड़क मार्ग से आने के लिए आप बिहार के किसी भी शहर से होते हुए सोनपुर पहुंच सकते हिन् जो की छपरा-हाजीपुर-पटना मुख्य मार्ग के बिच है, तो आइये और विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला का आनंद लीजिये। 

हम उम्मीद करते हैं की, हमारा ये संकलन आपको बेहद पसंद आया होगा ! और यदि आप हमे कोई सुझाव देना चाहते हैं अथवा हमसे कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से दे अथवा पूछ सकते हैं ! धन्यवाद् !!

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नमस्कार...!! इस खूबसूरत संकलन को आपलोगों के समक्ष ज्ञानवाटिका संपादन टीम के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके प्रधान सम्पादक और एडमिन विकास कुमार तिवारी जी हैं. इस खूबसूरत संग्रह को बनाने और आपके समक्ष लाने में कई दिन और कई रातों का सतत प्रयास शामिल है, और हम आगे भी इसी निष्ठा से आपके समक्ष महत्वपूर्ण तथा अनमोल जानकारियों को संकलित कर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं...! इसके साथ ही हम इस बात के लिए भी आशान्वीत हैं की आप सभी अपना महत्वपूर्ण सुझाव देकर, इस खूबसूरत संकलन को और खूबसूरत बनाने में हमारी मदद अवश्य करेंगे !

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