वैदिक धर्म क्या है तथा यह सर्वश्रेष्ठ क्यों है?

0
688
Vedic Dharma

जब ब्रम्हा ने सृष्टि की रचना की तो उन्होंने सृष्टि को चलाने और एक सूत्र में बांधने हेतु वेदों की भी रचना की, ऐसा मानते हैं की आज पृथ्वी पर जो भी ज्ञान मौजूद है उसका सूत्रधार वेद है ! सभी भाषाओँ का तथा सभी प्रकार के ज्ञान का उद्गम वेद से ही है! ईश्वर ने सृष्टि बनाते समय ये कभी नहीं सोंचा होगा की उसकी बनायीं हुयी इतनी खूबसूरत कृति भी धर्म के नाम पर अलग अलग गुट में बँट जायेगी !

आज अगर धर्म के ठेकेदारों की सुने तो, कुरान कहती है : मुस्लिम बनो। बाइबिल कहती है : ईसाई बनो । लेकिन सिर्फ वेद है जो ये कहता है की मनुर्भव अर्थात मनुष्य बनो (ऋग्वेद 10-53-6)।

और होना भी यही चाहिए, विज्ञानं के अनुसार किसी भी वस्तु के स्वाभाविक गुणों को उसका धर्म कहते है, जैसे अग्नि का धर्म उसकी गर्मी और तेज है। गर्मी और तेज के बिना अग्नि की कोई सत्ता नहीं। अतएवं मनुष्य का स्वाभाविक गुण भी मानवता ही है और यही उसका धर्म है।

अत: वेद मानवधर्म का नियम शास्त्र है। जब भी कोई समाज, सभा या यंत्र आदि बनाया जाता है तो उसके सही संचालन के लिए नियम पूर्व ही निर्धारित कर दिये जाते है परमात्मा ने सृष्टि के आरंभ में ही मानव कल्याण के लिए वेदों के माध्यम से इस अद्भुत रचना सृष्टि के सही संचालन व सदुपयोग के लिए दिव्य ज्ञान प्रदान किया। अत: यह कहना गलत है कि वेद केवल आर्यों (हिंदुओं) के लिए है, उन पर जितना हक हिंदुओं का है उतना ही मुस्लिमों का भी है।

मानवता का संदेश देने वाले वैदिक धर्म (Vedic Religion) के अलावा दूसरे अन्य धर्म किसी व्यक्ति विशेष द्वारा चलाये गए हैं और समय के साथ उन्होने अपने को ईश्वर का दूत व ईश्वर पुत्र बताया, ताकि लोग उनका अनुसरण करें। जैसे : इस्लाम धर्म पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) द्वारा, ईसाई धर्म ईसा-मसीह (Jesus-Christ) द्वारा और बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध (Buddha) द्वारा आदि। क्योंकि सभी अनुयायियों को उस धर्म के रास्ते पर चलाने वाले पर विश्वास लाना आवश्यक है। अत: ये धर्म नहीं, मत है। ये सब मत वैज्ञानिक (scientific) भी नहीं है, जबकि धर्म और विज्ञान का आपस में अभिन्न संबंध है।

जहाँ धर्म है वहाँ विज्ञान है। यदि आप स्टडी करेंगे तो पाएंगे की बाइबिल में सूर्य को पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करना बताया है जबकि वेद कहता है कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर जल सहित घूमती है। इतना ही नहीं विज्ञान का कोई भी क्षेत्र हो, वेदों से नहीं छूटा। अत: जो मत विज्ञान की कसौटी पर खरे नहीं उतरते, वे धर्म भी नहीं है। गीता में श्रीकृष्ण जी कहते है कि ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ अर्थात जहाँ धर्म है वहाँ विजय है आगे आता है कि ‘वेदोsखिलो धर्ममुलं’ अर्थात वेद धर्म का मूल है !

वेदों के आधार पर महर्षि मनु ने धर्म के 10 गुण बताए है :

(1) धृति :- कठिनाइयों से न घबराना।
(2) क्षमा :- शक्ति होते हुए भी दूसरों को माफ करना।
(3) दम :- मन को वश में करना (समाधि के बिना यह संभव नहीं) ।
(4) अस्तेय :- चोरी न करना। मन, वचन और कर्म से किसी भी परपदार्थ या धन का लालच न करना ।
(5) शौच :- शरीर, मन एवं बुद्धि को पवित्र रखना।
(6) इंद्रिय-निग्रह :- इंद्रियों अर्थात आँख, वाणी, कान, नाक और त्वचा को अपने वश में रखना और वासनाओं से बचना।
(7) धी :- बुद्धिमान बनना अर्थात प्रत्येक कर्म को सोच-विचारकर करना और अच्छी बुद्धि धारण करना।
(8) विद्या :- सत्य वेद ज्ञान ग्रहण करना।
(9) सत्य :- सच बोलना, सत्य का आचरण करना।
(10) अक्रोध :- क्रोध न करना या क्रोध को वश में करना।

इन दस नियमों का पालन करना ही धर्म है और यही धर्म के दस गुण है। यदि ये गुण किसी भी व्यक्ति में है तो वह धार्मिक है। मनुष्य बिना सिखाये अपने आप कुछ नहीं सीखता है, अत: ईश्वर ने मनुष्य के सीखने के लिए जो ज्ञान दिया है वो धर्म है। इस बात को यदि हम सब संज्ञान में लें तो एक स्वस्थ और सम्पूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं ! अतएवं वैदिक धर्म सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि वह आपको मनुष्य बनना सिखाता है और मानवता का पथ पढाता है !

हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा ये संकलन पसंद आया होगा, अब यदि आपके मन में कोई प्रश्न है या आप हमे अपना कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में आप दे सकते हैं !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here